दुनिया के सारे दार्शनिकों में इस बात पर विवाद है, काल निरपेक्ष है या सापेक्ष है! उनसे मेरा सवाल है यदि काल है निरपेक्ष , तो क्यों जुलाई को जून की अपेक्षा है! काल निरपेक्ष हो तो मैं समय की नदी पर एक पुल बनाऊं, और सीधे मई से जुलाई पर चली जाऊं, कि निरपेक्षता की पुल के सहारे, जून की क्रूर धारा को पार कर जाऊँ। जून!जैसे बाहर का मौसम,वैसा ही अन्तर्मन का हाल। अन्तर्मन कि जैसे बंजर जमीन, तिसपर जख्मों की तपिश,यादें नासूर बन रिसते हुए, कुछ घाव पीठ पर घमौरियां बन चुभते हुए, नदियों के साथ आंखों का पानी भी मरता हुआ।। जून!कि ये लम्बी और तपती दुपहरी,फिर फिर लौट के आई छुट्टी,न किसी का आना,न जाना, तिसपर पिछले जून मां का चले जाना!! टी.एस.इलियट ने कहा था”अप्रैल इज द क्र्यूलेस्ट मंथ” नहीं, जून भी वास्तव में कैलेंडर का क्रूरतम माह है, कि बड़ी क्रूरता से अंदर मे फैले रेगिस्तान को सतह पर ला देता है। उफ!!जून इज दी वेरी क्र्यूलेस्ट मंथ।।
गंगा,गंडक एवं घाघरा नदी से घिरा छपरा अपने तमाम पुरातात्त्विक एवं धार्मिक स्थलों के साथ भारत में मानव बसाहट के सबसे प्राचीन स्थलों में से एक है जहाॅं का पुरातत्व स्थल चिरांद इसकी ऐतिहासिकता का गवाह है। छपरा से 11 किलोमीटर दूर स्थित यह पुरातत्व स्थल ईसा पूर्व 2000, यानी आज से 4000 साल पुराना माना जाता है। वह सिद्धार्थ जिन्होंने मनुष्य रूप में सर्वोच्च नैतिकता के स्तर को प्राप्त किया और बुद्ध कहलाएं;जिन्होंने सर्वोच्च दार्शनिक अवधारणा निर्वाण (मुक्ति) को यथार्थ बनाया,ऐसी मान्यता है कि उनके प्रिय शिष्य आनंद ने इसी स्थल पर जलसमाधि ली थी।इसी कारण इस स्थल का नाम चिरांद है कि वह जो यहां समाधिस्थ हुयें,चिर (कभी न समाप्त होने वाले) + आनंद में समाधिस्थ हैं। संभवतः आमजन की बोली में यह चिर आनंद चिरांद हो गया। बहरहाल, नवपाषाणकाल का प्रथम उत्खनन भारत में यहीं प्राप्त हुआ। पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण में ताम्रपाषाणिक युग, नवपाषाण और लौह युग के अवशेष बरामद किए गए है। यहाँ 2500 ईसापूर्व से 40 ईस्वी तक के बनाये गए घरों के अवशेष भी बरामद किए गए है।खुदाई के दौरान कृषि में उपयोग किये जाने वाले सामग्री सहित ...