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गणतंत्र दिवस और उस लड़की के स्वप्न...

उस लड़की के घर में स्वतंत्रता दिवस,गणतंत्र दिवस जैसे दिन एक उत्सव के रूप में मनाया जाता था।उसके पिताजी का कथन था कि ये दो दिन तो राष्ट्रीय पर्व का दिन है।पिताजी अन्य त्यौहारों पर भले उत्साहित रहें न रहें‌ अथवा मां के कहे अनुसार भोजन तथा अन्य त्यौहार अनुसार सामग्रियां लेकर आतें किंतु स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर वे बिना कहे भोजन सामग्री ले आतें और मां को बनाने को कहते।सुबह-सवेरे ही घर में टेलीविजन खुल जाता और दोनों दिनों के ध्वजारोहण सहित अन्य कार्यक्रम तथा गणतंत्र दिवस पर होने वाली विभिन्न झांकियों का पूरा परिवार मिलकर आनंद लेतें।जाहिर सी बात है कि वैसे माहौल में कौन भला होगा जो सोया रहे।

पिताजी बराबर सब भाई-बहनों को सुबह जल्दी उठकर टेलीविजन पर चलने वाले कार्यक्रमों को देखने के लिए कहतें।किंतु वह‌ लड़की उस माहौल में भी सोई रहती।मां डराती कि उठ जाए अन्यथा पिताजी नाराज़ होंगे।किंतु वह लड़की इतना ही कहती कि वह एक दिन वहां उपस्थित होकर इन‌ दो दिनों के कार्यक्रमों को देखेगी और वह भी किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में उसे अवसर मिलेगा और तब तक वह टेलीविजन पर नहीं देखेगी।मां इस बात से खीझ जाती और कहती कि 'हां सुत्ता तब!काहे कि सपना देखे बदे सुत्ते के त चाही न!' और गुस्सा होकर चली जाती।सब आस-पड़ोस के दोस्त इस बात पर,उस लड़की के स्वप्न पर उसपर हंसते,कुछ मुंह पीछे हंसते।कुछ मुंह पीछे पागल कहतें।किंतु एक धुन थी कि सम्मान के साथ सामने बैठकर ही गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस का आनंद लिया जाएगा और तब तक टेलीविजन पर देखना टाला जाएगा।

बहरहाल,

सपना बड़ा और उस समय की स्थिति ऐसी कि एक दिन विश्वविद्यालय से घर लौटते समय साइकिल में हवा‌ भरवाने के लिए दो रूपए की आवश्यकता थी और बैग में एक ही रूपया पड़ा था।वह तो भला हो कि हवा भरने वाली दुकान पर बैठने वाला व्यक्ति उस लड़की को पहचानता था सो उसने एक रूपए में साइकिल में हवा भर दी।

एक और किस्सा उस लड़की का सुनाती हूं कहीं से सौ रूपए एकबार मिल गया,गली में फेरी वाला आया,उसकी पड़ोस की सहेली ने एक सूट खरीदा,उस लड़की ने अपने सौ के नोट को देखा,पुस्तकों की आवश्यकता को समझा और मन को मसोस कर सूट खरीदना निरस्त कर दिया।

किंतु ऐसी परिस्थितियों के बाद भी उस लड़की के स्वप्न बहुत ऊंचे थें।स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर एक अधिकारी अथवा सम्मानित व्यक्ति के रूप में उपस्थित होने का स्वप्न तो बहुत छोटा सा स्वप्न था उस लड़की के लिए और उपरोक्त दो परिस्थिति मात्र उस लड़की के जीवन-संघर्षों की एक छोटी सी झलक।अन्यथा तो सफलता का बाना तमाम तरह के असफलताओं से,तानों से,आत्मा तक को हताश कर देने वाले संघर्षों से बुना हुआ है।

गणतंत्र दिवस पर यह किस्सा साझा करने का उद्देश्य एकमात्र यह है कि जीवन संघर्ष का पर्याय है और आनंद,सुकुन,शांति जीवन के विरोधाभासी हैं।किंतु दो विलोम,दो विरोधियों के मध्य समायोजन करने की कला मनुष्य के पास है और यही उसमें जीजिविषा को बनाए रखती है।मनुष्य के पुरूषार्थ को सिद्ध करती है।

किंतु इसके लिए सबसे आवश्यक है स्वस्थ रहना।उसमें भी मानसिक मजबूती तो एक तरह से अनिवार्य प्रस्तावना की भांति है।इसके बिना कुछ संभव नहीं।हम छोटे-छोटे दुखों से टूट जाते हैं,बिखर जाते हैं किंतु हमें यह समझना होगा कि प्रत्येक व्यक्ति कहीं न कहीं किसी स्तर पर संघर्ष कर रहा है और संघर्ष वह‌ अपनी मानसिक शक्ति के बल पर ही कर पाता है।हमें जीवन की दीर्घ से दीर्घ संघर्ष के दिनों में नहीं टूटना है,ह्रदय के गहनतम दुख से नहीं बिखरना है।अपितु मानसिक शक्ति के बल पर पहाड़ सी चुनौती भी हो तो उसे तिनके सा उड़ा देना है।समंदर सा दुख भी हो तो उसे अंजूरी में भरकर पी जाना है।

हम सफलता की कहानी तो बड़े चाव से सुनाते हैं,बहुधा हम जीवन में मिले हार को,जीवन की असफलताओं को साझा करना पसंद नहीं करतें किंतु कौन जाने हमारे किस बात का,किस शब्द,किस किस्से का असर किसी पर सकारात्मक रूप से पड़े।इस उद्देश्य से यह बात यहां साझा की गई है।कल गणतंत्र दिवस भी है तो अतीत न चाहते हुए भी अपने गलियारे में ले चलता है।

अंत में बस यही कि हम सबके जीवन में अथाह संघर्ष है,हम सबके आसपास ऐसे व्यक्ति हैं जो जीवन से निरंतर संघर्ष कर रहे हैं,अपनी बुद्धि और समझ अनुसार धर्म और सत्य पर टिके रहकर।किंतु हर किसी के जीवन पर नहीं लिखा जाता महाकाव्य।किंतु अपने को सशक्त,स्वस्थ रखकर हम कम से कम इतना तो लिख सके कि कहीं कोई हताश-निराश हो तो हमारे आत्मकथ्य को पढ़कर कुछ आशा,कुछ उम्मीद प्राप्त कर सकें,अथाह शक्ति का उसे एक छोटा सा ही सही स्त्रोत मिल सके और जीवन की तमाम चुनौतियों से न केवल लड़ सके अपितु उसपर विजय भी प्राप्त कर सके।

कोई किस्सा,कोई कहानी हार की,असफलता की,तानों-व्यग्यों की,दुख की,पुनः पुनः गलत समझ लिये जाने की पुनः कभी...

तस्वीर उसी लड़की की वर्ष 2023 की जब बिहार -झारखंड राज्य के एन.एस.एस. टीम की दलनायिका के रूप में दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड शिविर में भाग लेने और कर्तव्य पथ पर वीआईपी विंग में उपस्थित होकर गणतंत्र दिवस समारोह को देखने का अवसर मिला...





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