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Simone de Beauvoir

 

सिमोन,दुनिया के उन कुछ व्यक्तित्व में से एक हैं जो मुझे बेहद पसंद हैं।जबकि उनके सिद्धांतों,उनके जीवन जीने के तरीकों,उनके प्रेम संबधों,उनके विचारों से मुझे घोर असहमति है।किन्तु फिर भी सिमोन मेरी फेवरेट हैं।फेवरेट या पसंद करने के लिए,किसी का आदरणीय बनने के लिए बिलकुल आवश्यक नहीं कि हम उसके प्रत्येक बातों-विचारों से सहमत ही हों।

बहरहाल, 

सिमोन मुझे पसंद हैं क्योंकि उन्होंने जीवन को अपनी शर्तों पर जिया।अपने सपने पूरे करने के लिए जीवन में रिस्क लिया।अपने उसूलों,अपने सिद्धांतों के लिए अपने प्रेम (उनके समकालीन महान अस्तित्ववादी दार्शनिक ज्यां पाॅल सार्त्र से उनके प्रेम प्रसंग उन दिनों पूरे यूरोप में चर्चा का विषय था) को भी ठुकराने से गुरेज़ नहीं किया।मुझे वो लोग पसंद आते हैं जो जीवन में किसी से प्रेम करते हैं और बेइंतहा करते हैं जैसे सिमोन ने सार्त्र से किया।किन्तु मुझे वो लोग बहुत पसंद आते हैं जो जीवन में अपने कैरियर,अपनी स्वतंत्रता को प्रत्येक स्थिति में प्राथमिकता देते हैं और दोनों का बेहतरीन तालमेल जीवन में बिठाते हैं।जैसे कि सिमोन ने किया।सार्त्र से बेहद प्रेम करने के बाद भी अपने क्षेत्र में आगे बढ़ीं और न केवल अपने समय की महिलाओं बल्कि प्रत्येक देशकाल की महिलाओं के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया।

 'प्रेम करना खूबसूरत है किंतु कैरियर आलातरीन और स्वतंत्रता बेहतरीन'। 

सिमोन ने जो कहा,जो माना,जीवन को ठीक वैसे ही जिया।मेरे लिए अगर कोई आदरणीय हो सकता है तो वह वही होगा जिसकी कथनी और करनी में अंतर न हो।वह जो कहे,माने,उस अनुसार जीवन को जीने की हिम्मत रखता हो।हम बहुधा अपनी सुविधा के लिए आदर्श और व्यवहार इन दो रूपों में जीवन का बंटवारा कर देते हैं।बातें आदर्शवादियों जैसे किंतु यथार्थ के ठोस धरातल पर जिसके सब आदर्श धूल-धूसरित हो जायें,वह कब किसका आदरणीय हो सकता है या समाज के लिए उदाहरण बन सकता है!मैं सिमोन के सामाजिक ढांचे को लेकर उनकी सोच से एकदम असहमत हूँ किंतु मैं उन्हें इस बात के लिए एक बेहतर सामाजिक उदाहरण मानती हूँ कि हम जैसा सोचते,बोलते और स्वयं को दिखाते हैं औरों के समक्ष,हम वैसा जी भी सकते हैं जीवन को।

हम स्त्रियों को इतना साहसी होना ही चाहिए।


मैं सदैव सबसे कहती हूँ कि जीवन बहुत कठिन है,सबके जीवन में तमाम समस्याएं हैं,कुछ कष्ट ऐसे भी होते हैं जो दिल इस तरह तोड़ते हैं कि उनकी किरंचे जीवनभर स्वयं के ह्रदय में ही चुभते हैं,चुभते रहेंगे।किंतु मैं फिर भी उन तमाम कष्टों,किरंचियों,दुखों,परेशानियों को एक ओर रखकर जीवन में सदैव आगे बढ़ने के लिए लोगों को प्रेरित करती हूँ।स्वयं भी ऐसा करती हूँ।सिमोन का जीवन भी ऐसा ही था। जिस काल में स्त्रियों को आधारभूत मानवीय अधिकार नहीं थें,उस काल में सिमोन स्त्रियों के गरिमामयी अस्तित्व को स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहीं थीं।तमाम आक्षेपों,आलोचनाओं को सहते हुए भी अपने समय से आगे की सोच रहीं थीं।हम स्त्रियों को कुछ मामलों में उनका बेहद धन्यवाद करना चाहिए जबकि मैं उनकी अधिकतर बातों से असहमति रखती हूँ। 

मुझे वो लोग बहुत पसंद आते हैं जो अपने इमेज की चिंता किये बगैर वह कार्य करने में जुटे रहते हैं,जो उन्हें लगता है कि उन्हें करना चाहिए।मैं अपने जीवन को ऐसे ही जीना पसंद करती हूँ।सामने वाले ने मुझे प्रेम और सम्मान दिया मैंने सिर झुकाकर लिया और खूब जतन से संभाल कर रखने का प्रयास किया।इसने जीवन में मुझे पंख दियें जिससे मैं अपने सपनों को पूरा कर सकूँ।सामने वाले ने मुझे गाली दी,अपमान किया,आलोचना की,मैंने पूरा प्रयास किया उसकी सीढ़ी बना लूं जिसपर चढ़कर मैं अपनी मंजिल को साफ-साफ देख सकूँ।लेकिन अंततः मैं इन दोनों की परवाह किये बिना वही करती हूँ जो मुझे ठीक लगता है,उचित लगता है बिना अपने इमेज की चिंता किये।सिमोन इसीलिए मुझे बेहद भाती हैं क्योंकि इमेज की परवाह किये बिना वह अपने जीवन को जीती रहीं ठीक वैसे जैसे उन्हें लगता था कि स्त्रियों को जीना चाहिए। 

सिमोन चाहतीं तो सार्त्र को अपना जीवनसाथी बनाकर एक आरामदायक जीवन जी सकती थीं किंतु उन्होंने निरंतर संघर्ष किया,अकेले किया।क्योंकि एक आरामदायक जीवन के बजाय उन्हें अपने सिद्धांतों के अनुरूप चलना ठीक लगा जबकि वह भलीभाँति जानती थीं कि इस मार्ग में केवल कांटे मिलेंगे,अपमान मिलेगा,और तो और सार्त्र बिलकुल नही मिलेंगे। 

अपने सिद्धांत और अपने सिद्धांतों के अनुरूप जीने के लिए अपनी स्वतंत्रता,इनसे बढ़कर कुछ नहीं होना चाहिए।जीवन की सफलता को इस बात से नहीं मापना चाहिए कि हमने अपने जीवन में कितनी प्रसिद्धि पाई,कितना पैसा कमाया,कितने ऐशोआराम की जिंदगी बनाई।जीवन की सफलता इस बात से मापी जाती है कि हमने अपने उसूलों पर जिंदगी कैसे जी!अपनी स्वतंत्रता को बनाये रखने के लिए क्या किया!अपनी स्वतंत्रता को अपने कैरियर से कैसे जोड़ा!और सिमोन इन कसौटियों पर पूरी तरह सफल हैं।

मैं जीवन के अपने अंतिम क्षणों में इसी बात का हिसाब कर खूब चैन और सुख से मरूंगी कि मैं बेहद सफल रही।भले मुझे मान के साथ अपमान मिला,प्रेम के साथ अकेलापन मिला!विश्वास के बदले छल मिला!तो क्या हुआ!

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