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आत्मसंलाप...

 

छायाचित्र देवभूमि के मुक्तेश्वर से;जो सम्भवतः मुक्त करे आत्मसंलाप से।

पिता को समर्पित अर्घ नहीं पहुँच रहे हैं उन तक !
उसे अधर में ही रोक लिया है उनकी वेदनाओं के आर्तनाद ने…

माँ के कपकपाते हाथों ने तो नहीं पर मेरी ही नियत ने अवरुद्ध कर दिया है मेरे शुभ कर्मों के प्रभावों को,जिसको मैं जब- तब दंभ में चूर हो,प्रयोग में लाती थी अपने हर कर्म के बचाव में…

जवानी के दिनों में मेरी समस्त चेतना को कैद कर लिया था कभी न पूरी होने वाली वासनाओं और बजबजाते इच्छाओं के रंगमहल ने…

और अब मार की सेनाएं पृथ्वी पर वापस भेज रही हैं,स्वर्ग के देवताओं को सम्बोधित मेरी समस्त प्रार्थनाएँ…

अकेलेपन से भयभीत मेरी प्रार्थनाएं अब नहीं पहुंचेंगी पितरों के लोक तक,जानती हूँ लिखे जाने वाले शब्द व्योम में घूमते रहेंगे अनंत तक,
और अर्थ समा जाएंगे “कृष्ण विवर” में…

प्रेम में पगे भाव बीन बीन कर खा रहे हैं पीठ पर छुरा घोंपने वालों के पात्र से गिरी झूठन …


ब्रूटसों की भूख की हूक से कम्पित हैं देवालय ,
सीजर की चीख से भयभीत हैं देवदूत,खण्डित हो गई हैं मूर्तियां अश्विनीकुमारों की…

कर्ण हैं आश्चर्य में,क्या मैंने इसी धरा पर जन्म लिया था!उनकी वंशावली कलप रही है,क्या सिखाकर गए हे दानवीर?

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उस लड़की के घर में स्वतंत्रता दिवस,गणतंत्र दिवस जैसे दिन एक उत्सव के रूप में मनाया जाता था।उसके पिताजी का कथन था कि ये दो दिन तो राष्ट्रीय पर्व का दिन है।पिताजी अन्य त्यौहारों पर भले उत्साहित रहें न रहें‌ अथवा मां के कहे अनुसार भोजन तथा अन्य त्यौहार अनुसार सामग्रियां लेकर आतें किंतु स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर वे बिना कहे भोजन सामग्री ले आतें और मां को बनाने को कहते।सुबह-सवेरे ही घर में टेलीविजन खुल जाता और दोनों दिनों के ध्वजारोहण सहित अन्य कार्यक्रम तथा गणतंत्र दिवस पर होने वाली विभिन्न झांकियों का पूरा परिवार मिलकर आनंद लेतें।जाहिर सी बात है कि वैसे माहौल में कौन भला होगा जो सोया रहे। पिताजी बराबर सब भाई-बहनों को सुबह जल्दी उठकर टेलीविजन पर चलने वाले कार्यक्रमों को देखने के लिए कहतें।किंतु वह‌ लड़की उस माहौल में भी सोई रहती।मां डराती कि उठ जाए अन्यथा पिताजी नाराज़ होंगे।किंतु वह लड़की इतना ही कहती कि वह एक दिन वहां उपस्थित होकर इन‌ दो दिनों के कार्यक्रमों को देखेगी और वह भी किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में उसे अवसर मिलेगा और तब तक वह टेलीविजन पर नहीं देखेगी।मां इस बात से खी...

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