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विचारों का पंचनामा(2)…


1. सबसे अच्छा होता है जीते जी मुर्दा शांति से भर जाना।

2. सबसे खतरनाक होता है ईमानदारी का रोग लग जाना।

3. जिस मार्ग से महाजन जाएं,उस पर नहीं चलना चाहिए, बल्कि जिस पर चलकर आत्मा का सूरज डूब जाए, उस राह पर चलना चाहिए।

4. अपनी बौद्धिक क्षमता को भकोसवाना हो, बौध्दिक मेहनत को लूटवाना हो तो सरकारी नौकरी करना चाहिए।

5. जिंदगी की दुश्वारियां बढ़ानी हो,बिना चाकू- बंदूक के जीते जी मरना हो तो रिश्तेदारों को उधार दे दीजिए।

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आत्म-समीक्षा के दिन...

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गणतंत्र दिवस और उस लड़की के स्वप्न...

उस लड़की के घर में स्वतंत्रता दिवस,गणतंत्र दिवस जैसे दिन एक उत्सव के रूप में मनाया जाता था।उसके पिताजी का कथन था कि ये दो दिन तो राष्ट्रीय पर्व का दिन है।पिताजी अन्य त्यौहारों पर भले उत्साहित रहें न रहें‌ अथवा मां के कहे अनुसार भोजन तथा अन्य त्यौहार अनुसार सामग्रियां लेकर आतें किंतु स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर वे बिना कहे भोजन सामग्री ले आतें और मां को बनाने को कहते।सुबह-सवेरे ही घर में टेलीविजन खुल जाता और दोनों दिनों के ध्वजारोहण सहित अन्य कार्यक्रम तथा गणतंत्र दिवस पर होने वाली विभिन्न झांकियों का पूरा परिवार मिलकर आनंद लेतें।जाहिर सी बात है कि वैसे माहौल में कौन भला होगा जो सोया रहे। पिताजी बराबर सब भाई-बहनों को सुबह जल्दी उठकर टेलीविजन पर चलने वाले कार्यक्रमों को देखने के लिए कहतें।किंतु वह‌ लड़की उस माहौल में भी सोई रहती।मां डराती कि उठ जाए अन्यथा पिताजी नाराज़ होंगे।किंतु वह लड़की इतना ही कहती कि वह एक दिन वहां उपस्थित होकर इन‌ दो दिनों के कार्यक्रमों को देखेगी और वह भी किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में उसे अवसर मिलेगा और तब तक वह टेलीविजन पर नहीं देखेगी।मां इस बात से खी...

बरेली

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