काल निरपेक्ष है या सापेक्ष है!
उनसे मेरा सवाल है यदि काल है निरपेक्ष ,
तो क्यों जुलाई को जून की अपेक्षा है!
काल निरपेक्ष हो तो मैं समय की नदी पर एक पुल बनाऊं,
और सीधे मई से जुलाई पर चली जाऊं,
कि निरपेक्षता की पुल के सहारे,
जून की क्रूर धारा को पार कर जाऊँ।
जून!जैसे बाहर का मौसम,वैसा ही अन्तर्मन का हाल।
अन्तर्मन कि जैसे बंजर जमीन,
तिसपर जख्मों की तपिश,यादें नासूर बन रिसते हुए,
कुछ घाव पीठ पर घमौरियां बन चुभते हुए,
नदियों के साथ आंखों का पानी भी मरता हुआ।।
जून!कि ये लम्बी और तपती दुपहरी,फिर फिर लौट के आई छुट्टी,न किसी का आना,न जाना,
तिसपर पिछले जून मां का चले जाना!!
टी.एस.इलियट ने कहा था”अप्रैल इज द क्र्यूलेस्ट मंथ”
नहीं, जून भी वास्तव में कैलेंडर का क्रूरतम माह है,
कि बड़ी क्रूरता से अंदर मे फैले रेगिस्तान को सतह पर ला देता है।
उफ!!जून इज दी वेरी क्र्यूलेस्ट मंथ।।


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