जब मां चूमती है माथे को, वह चुंबन दरअसल आत्मा के माथे पर होता है।
जब प्यार भरता है बांहों में, देह नहीं,आत्मा सिमटती है बाहों में।
जब दोस्त देता है शाबाशी, वह आत्मा के पीठ को थपथपाता है।
मैंने अपनी आत्मा के सब स्पर्शों को खो दिया है।।

There is no any description... every word of this blog is only feelings for every heart who can feel
जब मां चूमती है माथे को, वह चुंबन दरअसल आत्मा के माथे पर होता है।
जब प्यार भरता है बांहों में, देह नहीं,आत्मा सिमटती है बाहों में।
जब दोस्त देता है शाबाशी, वह आत्मा के पीठ को थपथपाता है।
मैंने अपनी आत्मा के सब स्पर्शों को खो दिया है।।

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