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मृत्यु...

 ⚫. मृत्यु जंगल बुक के उस अजगर की तरह है जो मोगली रूपी जीवन को लीलने के लिए घात लगाए रहती है। किंतु हमारे जीवन में कोई भालू नहीं जो हमें लील लिए जाने से बचा ले।

⚫. मृत्यु वैश्या है और जीवन उसका यार, जब- जब कोई पूरी जीवटता से जीवन से सामना करने का प्रयास करता है,मृत्यु उसे लप्प से भकोस लेती है और इस तरह वो अपने यार को खुश करती है।

⚫. मृत्यु शिकारी कुत्ता है, वह सूँघता रहता है कि कौन बेखबर है उससे, और फिर उसे दबोच लेता है।

⚫. मृत्यु गांव- गुंवार का चिटकू बुढ़वा है,आप ने जरा सी ठिठोली की कि वह आपको दौडा लेता है। दुनिया मे उससे छिपने की जगह नहीं और जिसपर उसका हाथ पड़ा ,वो फिर बचा नहीं।

⚫. मृत्यु सांख्य के पुरूष के जैसे है, जिसका कार्य मात्र प्रकृति से संयोग कर जीवन का विस्तार करना और फिर अचानक प्रकृति से हाथ छुड़ाकर जीवन को समेट लेने पर विवश कर देना है।

⚫. मृत्यु एक बेहद क्रूर शिक्षक है जो जीवन का पाठ पढ़ाने के लिए अपने विद्यार्थी के सबसे प्रिय साथी को ही हर लेता है।

⚫. मृत्यु वह सनकी शासक है जो जीवन में संचित ज्ञान/सबक को एक दिन अग्नि के हवाले कर देता है।


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उस लड़की के घर में स्वतंत्रता दिवस,गणतंत्र दिवस जैसे दिन एक उत्सव के रूप में मनाया जाता था।उसके पिताजी का कथन था कि ये दो दिन तो राष्ट्रीय पर्व का दिन है।पिताजी अन्य त्यौहारों पर भले उत्साहित रहें न रहें‌ अथवा मां के कहे अनुसार भोजन तथा अन्य त्यौहार अनुसार सामग्रियां लेकर आतें किंतु स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर वे बिना कहे भोजन सामग्री ले आतें और मां को बनाने को कहते।सुबह-सवेरे ही घर में टेलीविजन खुल जाता और दोनों दिनों के ध्वजारोहण सहित अन्य कार्यक्रम तथा गणतंत्र दिवस पर होने वाली विभिन्न झांकियों का पूरा परिवार मिलकर आनंद लेतें।जाहिर सी बात है कि वैसे माहौल में कौन भला होगा जो सोया रहे। पिताजी बराबर सब भाई-बहनों को सुबह जल्दी उठकर टेलीविजन पर चलने वाले कार्यक्रमों को देखने के लिए कहतें।किंतु वह‌ लड़की उस माहौल में भी सोई रहती।मां डराती कि उठ जाए अन्यथा पिताजी नाराज़ होंगे।किंतु वह लड़की इतना ही कहती कि वह एक दिन वहां उपस्थित होकर इन‌ दो दिनों के कार्यक्रमों को देखेगी और वह भी किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में उसे अवसर मिलेगा और तब तक वह टेलीविजन पर नहीं देखेगी।मां इस बात से खी...

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