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विचारों का पंचनामा(8)…

 

बेशर्मी

1. कुछ लोग बेशर्मी धीरे-धीरे सीखते हैं,कुछ लोग जन्मजात बेशरम होते हैं।

2. तकनीक ने, सोशल मीडिया ने लोगों को बेशर्मी दिखाने की आसानी कर दी।

3. पहले मजबूरी में ही सही,लोग रिश्तेदारों,मित्रों को स्टेटस का भौंडा प्रदर्शन करने के लिए घर बुलाते थे,अब व्हाट्स्एप-ग्रुप, स्टेटस,फेसबुक,इन्स्टाग्राम ये काम बड़ी आसानी से हो जाता है।वो कहावत है न- ‘हल्दी लगे न फिटकरी,रंग भी चोखा’

4. इस बेशर्म दुनिया में अगर आप बेशरम नहीं बन पाते तो यकीन कीजिए आप निहायत मूर्ख हैं या हद दर्जे के भोले।

5. यकीन मानिये,आप के पास जितनी ऊँची डिग्री,उतने बड़े बेशरम बनने का अवसर।बौद्धिक वर्ग में,रिश्तेदारों में, मित्रों- सहकर्मियों में होड़ मची है बेशर्मी में प्रथम स्थान प्राप्त करने का।

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