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विचारों का पंचनामा(4)…

 

फोटो गूगल से।

1. हम सब जीवन द्वारा गढ़े गए अश्लील चुटकुले हैं जिन्हें वह समय को सुनाता है और फिर दोनों हमपर हंसते हैं।

2. यह जीवन इतनी निर्लज्ज मानो कोई निर्लज्ज स्त्री; यह जीवन इतना क्रूर मानो कोई क्रूर पुरूष।

3. जीवन ईश्वर रूपी बाहुबली के हाथ का कोड़ा है,जिससे जब तब वह हमें मारता रहता है।

4. मृत्यु ईश्वर की दासी है, गुलाम है, वह तभी आएगी जब ईश्वर का मन हमें तडपाने से भर जाएगा।

5. जीवन बेरोजगार ईश्वर के हाथों का जादू है जिसे दिखाकर, लोगों को बहला-फुसलाकर वह दो जून की रोटी का इंतजाम करता है और अपने परिवार का भरण-पोषण करता है।

नोट: ईश्वर के परिवार में कौन-कौन है, जानना हो तो  दर्शन पढ़िए।

(एक पंच जीवन पर)

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