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Showing posts from December, 2025

उपयोगितावाद...🦋

  मैं अपनी पीढ़ी के सबसे शानदार व्यक्तियों में से एक हूं इसलिए उतनी ही व्यर्थ,अनुपयोगी और बेकार।यह एक आधार वाक्य से निगमित निष्कर्ष है जिसे अव्यवहित अनुमान कहते हैं। सरल शब्दों में तत्काल निकाला गया निष्कर्ष है जबकि पास में केवल एक आधार वाक्य हो। किंतु यह निष्कर्ष सत्य माना जा सकता है क्योंकि आधार वाक्य से यह अनिवार्यत: निगमित होता है।इसको एक दूसरे तरीके से भी जांच कर सकते हैं कि निष्कर्ष के विरोधी वाक्य का आधार वाक्य से व्याघात संबंध है और व्याघात संबंध में दो तर्कवाक्यों में कोई एक ही सत्य हो सकता है। अतः यदि न्याय वाक्य के नियमों से भी उपरोक्त बातों को जांचे तो यह सत्य ही बैठता है। इस प्रकार आकारिक और व्यावहारिक दोनों प्रकार से इसकी सत्यता सिद्ध है। बहरहाल, मैंने जब-जब चाहा उपयोगी होना एक रंग उड़ गया मेरी आत्मा का,वह कुछ उद्धक लगने लगा।घबराकर मैंने आत्मा का रंग बचाना चाहा किंतु तब समय ने मुझे अनुपयोगी घोषित करने में देरी न की। अपने आत्मा के रंगों को लिए मैं दरकिनार की जाती रही, दरकिनार होती ही गई। दुनिया क्षणभर मेरी आत्मा के रंग को,उसकी सुंदरता को रूककर देखती,सराहती किंतु यह जान...

पीड़ाएं और एकांत... 🍁

 एक अरसे से मेरे दो ही मित्र रहें हैं। एक बीते समय की स्मृतियों से उपजी पीड़ाएं और दूजा इन स्मृतियों में लिपटा मेरा एकांत।यद्यपि समय क्या है,ये मुझे कभी स्पष्ट नहीं हुआ।विज्ञान की विद्यार्थी रहती तो संभवतः कुछ स्पष्ट होता!दर्शन ने तो समय की अवधारणा को अंततः परमअनुभूति के हवाले छोड़ रखा है किंतु उतनी साधना का साहस अबतक मुझमें नहीं।तब जब समय की अवधारणा ही स्पष्ट नहीं तब क्या बीता हुआ! क्या आने वाला और क्या वर्तमान! वैसे भी बहुधा हम वर्तमान में जीने के आदी भी नहीं होतें। वर्तमान अद्वैत के माया जैसी है जो ‘है’ किंतु हाथ नहीं आती।  हां, पीड़ा और एकांत की अवधारणा मेरे लिए स्पष्ट है। एक ओर ये स्मृतियों में लिपटी पीड़ाएं मेरी देह पर बढ़ई के रन्दे की तरह चलती है तो दूसरी ओर सीने में पीड़ाओं की जलती अखंड भट्टी में मेरी स्मृतियां पक-पक कर मेरा एकांत बुनती हैं जिसमें रहती है अनंत तक फैली उदासी! जैसे ईश्वर के हाथों से छूट गई हो आधी-अधूरी बनी दुनिया और वह बैठा हो इस दुख में उदास कि अब यह दुनिया हाथ न आएगी,यह तो छूट गई… मेरे जीवन में पहले जब भी खुशियां आती, मैं उन्हें कसकर गले लगाती कि उन्हें ...