कुछ तस्वीरें जो ईश्वर को नयी सृष्टि के लिए सहेज लेना चाहिए इस दुनिया के एल्बम से..... आत्मीय लोग स्मृति बन जाते हैं;प्राण से प्यारे एक दिन प्राण त्याग जाते हैं;लोग सपना बन जाते हैं तो सपने धुआं और सुख कपूर बनकर उड़ जाता है।जीवन को अर्थ देने वाले सब सिद्धांत एक दिन भ्रम सिद्ध होते है फिर मूल्यों की बात क्या कहूं!उम्र को तो बढ़ना ही है,धीरे-धीरे चेहरे की पुस्तक के पन्नों का रंग भी उड़ जाता है।हंसने की अदा भी एक दिन भूलने में आती है।सांसों की धवल धमक एक दिन क्षीण से क्षीणतर और मन पर बोझ लगने लगती है कि वह अब छूटी कि तब छूटी… शहर-दर-शहर भटकते-भटकते उसे अपनी जवानी दीजिए वो विदा में बेगानापन ही लौटाती है।एक दिन घर लौटने का भी कोई अर्थ नहीं बचता।अंततः एक दिन जीवन इस पेड़ की भांति खंख ही बचा रहता है।यही इसकी नियति है -खंख हो जाना।अहंकार इन दिनों में बूढ़े के लाठी जैसा क्या सहारा बनती होगी? मैं यही सोच रही थी रास्ते में अपनी खटखटिया स्कूटी रोककर।आने-जाने वाले मुझे देखतें और देखते हुए मानो उनकी दृष्टि व्यंग्यात्मक ढंग से पूछ रही थी मुझसे,"पागल हो क्या"?,उनको उत्तर देती मेरी निगाहें कह ...
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