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Showing posts from October, 2025

बरेली

 वर्ष 2011 - 12 की बात है;तब संघर्ष के दिन अपने पूरे यौवन पर थें।उन्हीं दिनों में बहन के घर से (बहेड़ी) जो उन दिनों डेरा था मेरा, से कार्यस्थल (बरेली) तक (जिसकी दूरी करीब पैंतीस किमी थी) रोज़ आना-जाना होता था।यात्रा का साधन कभी बस और अधिकतर रेलगाड़ी होती थी बहेड़ी से बरेली तक की रेलगाड़ी की यात्रा में करीब छोटे-छोटे सात-आठ स्टेशन पड़ते थें।किंतु मुझे उनमें बस एक ही नाम स्मृति में रहा,इज्ज़तनगर। स्मरण रहे जाने के दो कारण थें -एक तो नाम में ही जिसके इज्ज़त हो,उसे न याद रखना एक तरह से विश्वासघात ही होता अपने अतीत से और दूसरे इस स्टेशन या कहें छोटे से स्थान का स्थानीय लोगों द्वारा उच्चारण।वे इसे ऐजेडनगर कहकर बुलाते।अब भी बुलाते हैं,नहीं पता।मैं घर आकर अक्सर इस बात की खीझ बहन के सामने उतारती कि अच्छे भले नाम को लोग क्यों बिगाड़ते हैं!खैर, उन दिनों इस स्टेशन की हालत मुझ जैसी ही थी!समय का तंगहाल दौर!कमतरी के दोपहर,विषाद में डूबीं रातें,पीड़ाओं में आकंठ डूबा देह और मन।दोनों के बेतहाशा तपने के दिन थें। मौसम कौन सा रहे,इससे अंतर नहीं था। उन्हीं दिनों,घर से कार्यस्थल जाते समय ट्रेन में जब कभ...